
सुंदरनगर (मंडी)। सलापड़ से ध्वाल की महज दो सौ मीटर की दूरी को तय करने के लिए ग्रामीणों को 20 किलोमीटर का फेरा लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सतलुज नदी पर 18 करोड़ की लागत से बनने वाले 192 मीटर लंबे पुल को बनाने के लिए बीबीएमबी ने गत मई में बजट की मंजूरी प्रदान की है। पुल का निर्माण करने का जिम्मा बीबीएमबी ने प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को सौंपा है, लेकिन एक साल बीतने पर भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके कारण क्षेत्र के लोगों को वाहन से आवागमन करने में लंबी कसरत करनी पड़ रही है।
सलापड़ स्थित बीबीएमबी के डैहर पावर हाउस से ध्वाल की तरफ जाने वाले रास्ते को बीबीएमबी ने सुरक्षा कारणों से करीब छह साल पहले पैदल और वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया था। युवक मंडल ध्वाल के प्रधान देसराज, महामंत्री बलदेव बंसल व उपाध्यक्ष वेद प्रकाश के नेतृत्व में बीबीएमबी के इस फैसले के खिलाफ मुहिम चलाई गई। मामला जब पिछले साल जिला शिकायत निवारण समिति की बैठक में पहुंचा तो इस मामले पर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री रविंद्र रवि ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सतलुज नदी पर हरनोड़ा की तरफ से ध्वाल को पुल बनाने के लिए बीबीएमबी को निर्देश दिए। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को डीपीआर बनाने के निर्देश दिए गए। लोनिवि ने डीपीआर बना कर बजट मंजूरी के लिए बीबीएमबी को सौंपी थी। इसे बीबीएमबी ने मंजूरी प्रदान कर दी, परंतु इसमें बीबीएमबी ने एक शर्त लगाई कि लोनिवि पुल निर्माण में विभागीय खर्चा बजट में शामिल नहीं करेगा तथा इसके निर्माण के बाद इसकी मरम्मत का खर्चा भी प्रदेश सरकार ही वहन करेगी। बीबीएमबी की शर्त पर विभाग ने मंजूरी के लिए प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को लिखा है। जहां से एक साल से अधिक समय बीतने पर भी इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। देशराज ने कहा है कि अगर शीघ्र ही लोनिवि के इस मामले में कार्रवाई अमल में लाकर पुल निर्माण का कार्य आरंभ नहीं किया गया तो वे प्रदेश के उच्च न्यायालय की शरण में जाने को मजबूर होंगे। इधर, मुख्य संसदीय सचिव (लोनिवि) विनय कुमार से इस बारे संपर्क करने पर उन्होंने मामले की जांच कर शीघ्र ही इस मामले में आवश्यक कार्रवाई अमल में लाने की बात कही है।
